Biographyभारत के महान आत्मा मिल्खा सिंह का संपूर्ण जीवनी

भारत के महान आत्मा मिल्खा सिंह का संपूर्ण जीवनी

भारत के महान आत्मा मिल्खा सिंह का संपूर्ण जीवनी

इस कोरोना काल में भारत ने एक से बढ़कर एक महान आदमियों के मृत्यु को देखा है। दोस्तों आपको यह बता दें कि हाल ही में हमारे देश के एक महान आत्मा जिन्होंने हमारे देश के लिए बहुत कुछ किया और उनकी जीवनी भी एक फिल्मी कहानी की तरह है, उनका नाम है मिल्खा सिंह। मिल्खा सिंह जी अब हमारे इस दुनिया में नहीं रहे उन्होंने 91 वर्ष की आयु में अपने प्राण को त्यागकर परलोक चले गए।

यह हमारे पूरे देशवासियों के लिए अपूर्ति योग्य क्षति है। भारत की आजादी के समय खेल इतिहास में जिस आदमी ने अपने खेल के माध्यम से भारत का पहचान पूरी दुनिया में कराया, देश का वह बेटा अब हमारे बीच नहीं रहे, अपने खेलों से सभी का लोहा मनवाने वाले वीर मिल्खा सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। मिल्खा सिंह एक ऐसे धावक थे, जिन्होंने उस समय जिस समय की सुविधाओं की काफी कमी थी उन्होंने अपने लगन मेहनत और असाध्य तपस्या के द्वारा एक ऐसे धावक बने जिन्होंने पूरे दुनिया में अपना और अपने देश का नाम रोशन किया। मिल्खा सिंह हमारे पूरी देशवासियों के हृदय में सदा बसे रहेंगे।

Milkha Singh biography

आज हम आपको मिल्खा सिंह के वैसे कहानियों को बताएंगे जिसे सुनकर आप भी सोचेंगे कि उनके जीवन में कितनी बड़ी कठिनाइयां थी। इसके बावजूद भी उन्होंने उन सभी परिस्थितियों को नजरअंदाज कर ऐसी उपलब्धि हासिल की जो आज के समय में सभी लोगों के बस की बात नहीं है। उस समय में सुविधाओं का काफी अभाव था इस अभाव के बावजूद भी उन्होंने कड़ी से कड़ी मेहनत की क्योंकि उस समय में ना हो तो अच्छे जूते थे ना ही कोई अच्छा सलाह देने वाला व्यक्ति ऐसी स्थिति में भी अपने आप को दुनिया को दिखाना और अपने को साबित करना काबिले तारीफ है। हम उस महान आत्मा को तहे दिल से नमन करते हैं।

1. मिल्खा सिंह का जन्म, पालन पोषण, और पलायन

मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर 1929 ईस्वी को गोविंदपुर पाकिस्तान में हुआ था। यह रिकॉर्ड पाकिस्तान के अनुसार है जबकि भारत के कई राज्यों के ऑफिशियल रिकॉर्ड में उनके जन्म का वर्ष 17 अक्टूबर 1995 इसवी और 20 नवंबर 1935 ईस्वी दिया गया है। मिल्खा सिंह के माता और पिता का नाम किसी को भी ज्ञात नहीं है जबकि उनके दो भाई के नाम ईश्वर सिंह और मलखान सिंह है। उनकी पत्नी का नाम निर्मल सैनी है जो उनसे पहले ही स्वर्गवासी हो गए। मिल्खा सिंह के एक पुत्र और एक पुत्री का नाम जीव मिल्खा सिंह और सोनिया सांवलका है। जीव मिल्खा सिंह गोल्फ के शौकीन हैं।

मिल्खा सिंह की प्रारंभिक शिक्षा पाकिस्तान के स्कूल में ही शुरू हुई थी और उनका स्कूल उनके घर से 10 किलोमीटर की दूरी पर था। मिल्खा सिंह के पिता एक इज्जतदार मेहनती किसान थे। जब भारत और पाकिस्तान के बीच बटवारा हुआ उसके परिवार वालों ने कहा कि सभी आदमी भारत चलते हैं लेकिन उनके पिता ने उस स्थान को छोड़ने से मना कर दिया जिस जगह पर वह पहले से रहते थे तो भारत और पाकिस्तान में धार्मिक दंगे हुए इस दंगे में मिल्खा सिंह के सामने ही उनके माता पिता को मार दिया गया। उसके बाद मिल्खा सिंह किसी तरह से वहां से भाग कर पलायन कर भारत आ गया जहां उसे कैंपों में रखा गया कैंप में उसे एक अपनी बहन मिली जो एक महीना पहले ही लापता थी। यही उसकी बहन मिल्खा सिंह का देख देख किया करती थी इसके बाद इन सभी को भारत सरकार के द्वारा रहने के लिए घर दिया गया। इसके बाद मिल्खा सिंह भारत में चंडीगढ़ तरफ रहने लगे।

2. मिल्खा सिंह का शिक्षा और खेल प्रशिक्षण

मिल्खा सिंह ने अपने सामने ही अपने मां-बाप को मारते देखा था अतः उनकी सबसे ज्यादा रुचि थी कि वह भारतीय सेना में शामिल हो इसके लिए वह दिन रात मेहनत करते रहते थे। मिल्खा सिंह ने इतना जुनून था कि वह रेलगाड़ियों का भी दौड़कर पीछा करते थे और वह एक लंबे कद काठी के आदमी थे। भारतीय सेना की रेस में वह तीन बार रेस लगाने में असफल रहे लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और चौथी बार में उन्होंने दौड़ को पास किया। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना में 1952 में विद्युत मैकेनिकल इंजीनियर शाखा में शामिल हुए। इस दौरान वह भारतीय सेना की ट्रेनिंग करते रहे इसके बाद सशस्त्र बल के कोच हवलदार गुरुदेव सिंह ने उन्हें दौड़ के लिए प्रेरित किया, क्योंकि वह इससे पहले भी दौड़ते थे जिससे कि काफी आदमी को बहुत दूरी का लीड दे देते थे। आर्मी ज्वाइन करने से पहले भी मिल्खा सिंह ने कटक में 200 और 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया था और यहां पर उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और नेशनल रिकॉर्ड भी बना लिए। मिल्खा सिंह को दूध पीना पसंद था इसीलिए उन्होंने स्पोर्ट कोटा को चुना और हविलदार गुरुदेव सिंह के प्रेरणा के कारण उन्होंने दौर शुरू कर दी। एक बार एकेडमी के आदमी के द्वारा ही उसे चैलेंज दिया गया कि क्या वह उसको हरा देगा इसके बाद मिल्खा सिंह ने उस चैलेंज को स्वीकार कर लिया। और उसने उस व्यक्ति को बुरी तरह से हराया इसके बाद मिल्खा सिंह को एथलीट की स्पेशल ट्रेनिंग के लिए चुना गया। मिल्खा सिंह इतनी मेहनत से ट्रेनिंग करते थे कि उनके शरीर से 2 लीटर पानी पसीने के रूप में निकल जाते थे कई बार तो उनके पैरों से भी खून निकलने लगता था।

3. मिल्खा सिंह का खेलों में प्रदर्शन और अवार्ड

मिल्खा सिंह अपनी मेहनत पर इतना ध्यान देते थे कि लगता था कि कोई व्यक्ति अपने पूरे जुनून के साथ किसी काम पर ध्यान दे रहा है। इसके बाद पटियाला में एक आयोजन हुआ इस आयोजन में मिल्खा सिंह ने 400 मीटर की दौड़ में नेशनल रिकॉर्ड को तोड़ा उन्होंने 400 मीटर की दौड़ को 47.9 सेकंड में पूरा कर लिया। जो कि यह पहले का रिकॉर्ड 48 सेकंड का था। इस रिकॉर्ड को तोड़ने के बाद मिल्खा सिंह का सिलेक्शन 1956 में मेलबर्न में आयोजित ओलंपिक में जाने का मौका मिला। यह ओलंपिक मिल्खा सिंह का पहला ओलंपिक था पर अनुभव के कमी के कारण खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। इस हार से उन्होंने सबक सिखा और उन्होंने अपने ट्रेनिंग का टाइम और फोकस दोनों बढ़ा दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि साल 1958 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया मिल्खा सिंह ने एशियन गेम्स के 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल को अपने नाम किया, फिर मिल्खा सिंह ने 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स ऑफ इंडिया में 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक को अपने नाम किया।1958 में उन्होंने कार्डिफ में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम में अच्छा प्रदर्शन किया उन्होंने 440 यार्ड की दौड़ में स्वर्ण पदक को जीता। इस तरह से मिल्खा सिंह ने अपने प्रदर्शन के दम पर पूरे भारतीयों का दिल जीत लिया। अब बारी थी 1962 में आयोजन होने वाले एशियन गेम्स की इस एशियन गेम में भी मिल्खा सिंह ने जकार्ता में 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ग पदक हासिल की इसके अतिरिक्त उन्होंने 4 × 400 मीटर रिले में भी जकार्ता में स्वर्ण पदक को हासिल किया। इसके बाद पुनः उन्होंने 1964 वीं में नेशनल गेम्स में 400 मीटर की दौड़ में रजत पदक को हासिल किया

4. मिल्खा सिंह की अंतरराष्ट्रीय पहचान और उपनाम

1998 के कॉमनवेल्थ गेम में मिल्खा सिंह ने गोल्ड मेडल जीता था इसमें उन्होंने पाकिस्तानी एथलीट अब्दुल खालिद को हराया था। इस हार का अब्दुल खालिद को बहुत दुख था। मिल्खा सिंह को 1960 में भी ओलंपिक खेलने का मौका मिला और यह ओलंपिक रोम में शुरू हुआ था। इस ओलंपिक को शुरू होने से पहले सिंह ने 80 रेसो में भी भाग लिया था जिनमें से 77 रेसो में जीत हासिल की थी। लोगों को यह उम्मीद थी कि इस बार मिल्खा सिंह ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करेगा और गोल्ड मेडल लाएगा। मिल्खा सिंह ने सभी मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया जब फाइनल मैच चल रहा था तो मिल्खा सिंह कुछ ही सेकंड में सबसे आगे निकल गए और मिल्खा सिंह पीछे मुड़ कर देखने लगे जिससे उनकी स्पीड कम हो गई और तीन खिलाड़ी उनसे आगे निकल गए और मिल्खा सिंह यह रेस हार चुका था। 1960 ईस्वी में एक बार फिर से मिल्खा सिंह को पाकिस्तान की ओर से चैलेंज आया और दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया, इस दौड़ प्रतियोगिता में मिल्खा सिंह शामिल नहीं होना चाहते थे लेकिन उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कहने पर उन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में पाकिस्तान की ओर से अब्दुल खालिद हिस्सा ले रहे थे जिसे मिल्खा सिंह ने 1958 के कॉमनवेल्थ गेम में हराया था। इस दौड़ में भी मिल्खा सिंह ने तेजी से फुर्ती दिखाते हुए झटके से सबसे आगे निकल गए और किसी भी खिलाड़ी का कोई पता नहीं था लोग इतने मंत्रमुग्ध होकर देख रहे थे कि पाकिस्तानी महिलाएं भी अपनी बुर्का उतार कर मिल्खा सिंह की तरफ देखने लगे। इसके बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने मिल्खा सिंह को मेडल देते हुए कहा कि तुम दौड़े नहीं उड़े हो और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने ही मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख का नाम दिया। अब मिल्खा सिंह पुरे दुनिया में मशहूर हो चुके थे। मिल्खा सिंह और मशहूर हो गए जब उनका अफेयर आस्ट्रेलियन एथलीट Betty Cuthber के बारे में पता चला।

5. मिल्खा सिंह की प्रसिद्धि, उनकी किताबें और उन पर बनी फिल्म

मिल्खा सिंह की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि लोग उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक होने लगे। उनके जीवन की दर्दनाक कहानी उनका कठोर परिश्रम और सुविधाओं की कमी के बावजूद अपना नाम और पूरे देश का नाम दुनिया के सामने रोशन करना यह अपने आप में बड़े गर्व की बात थी। मिल्खा सिंह ने अपने द्वारा जीते गए सभी मेडल को भारत सरकार और पूरे देश को समर्पित कर दिया इन सभी महिलाओं को पहिले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम की म्यूजियम दिल्ली में रखा गया था। अब इसे पटियाला म्यूजियम लखनऊ में रखा गया है, आप वहां जाकर इसे देख सकते हैं। आपको यह बता दें कि मिल्खा सिंह के ऊपर एक फिल्म भी बनी है जिसका नाम है भाग मिल्खा भाग। जब भाग मिल्खा भाग फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और लेखक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने इस कहानी को मिल्खा सिंह के सामने प्रस्तुत किया तो उन्होंने इस फिल्म के लिए 1 रूपये चार्ज में लिए थे। इस फिल्म के अभिनेता के रूप में फरहान अख्तर और अभिनेत्री के रूप में सोनम कपूर है, यह एक देश की सबसे बड़ी मोटिवेशनल फिल्म है। इस फिल्म को 2013 ईस्वी में रिलीज किया गया। इसके अलावे 2013 ईस्वी में ही मिल्खा सिंह और उनके पुत्री सोनिया सांवलका द्वारा एक किताब लिखी गई जो मिल्खा सिंह के जीवन के ऊपर है। इस पुस्तक का नाम है द रेस ऑफ माय लाइफ। 18 जून 2021 ईस्वी को उस महान आत्मा ने चंडीगढ़ में अपना प्राण त्याग दिया और हम सबको छोड़कर पंचतत्व में विलीन हो गया। यह हमारे देश के लिए अपूरणीय क्षति है हम उस महान आत्मा की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उन्होंने हमारे देश के लिए अपनी पूरी जान और मेहनत झोंक दी।

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